महासमुन्द

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महासमुंद नगर में विजयादशमी उत्सव: 'पथ संचलन' और 'बौद्धिक सभा' से जाग्रत हुआ सामाजिक चेतना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महासमुंद नगर में विजयादशमी उत्सव: 'पथ संचलन' और 'बौद्धिक सभा' से जाग्रत हुआ सामाजिक चेतना

संवाददाता: प्रभात मोहंती

महासमुंद :  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) महासमुंद नगर के शहीद भगत सिंह बस्ती में विजयादशमी उत्सव का कार्यक्रम अभूतपूर्व उत्साह और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ। शहीद भगत सिंह बस्ती के सभी स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में दोपहर 2:30 बजे एकत्र हुए। संघ स्थान पर संपत और ध्वज प्रणाम के बाद स्वयंसेवकों ने घोष वाद्य यंत्रों के साथ आकर्षक पथ संचलन निकाला जो लोहिया चौक से होते हुए नेहरू चौक, अम्बेडकर चौक, पुराना मछली बाज़ार से आगे बढ़ा। इसके बाद यह गंजपारा क्षेत्र में पहुँचा, जहाँ आदित्य अस्पताल के सामने से गुजरते हुए, श्री राम टॉकीज और श्री काली माता मंदिर तक गया। यहाँ से संचलन पुराना माल धक्का चौक से आगे बढ़ते हुए, श्री झूलेलाल चौक और स्टेशन रोड से होते हुए, सायं 4:00 बजे अपने अंतिम पड़ाव लोहिया चौक पर वापस पहुँचा। स्वयंसेवकों का पथ संचलन केवल एक अनुशासित प्रदर्शन नहीं रहा, बल्कि यह नगरवासियों के लिए स्वागत और सम्मान का एक अवसर बन गया।

शहीद भगत सिंह बस्ती से घोष वाद्य यंत्रों की लय पर जब स्वयंसेवकों का पथ संचलन प्रारंभ हुआ, तो पूरे मार्ग पर उत्सव जैसा माहौल बन गया। शहर की माता-बहनों, व्यापारियों और शहरवासियों ने इस अनुशासित संचलन का अभूतपूर्व स्वागत किया। मार्ग के दोनों ओर खड़े नगरवासियों ने, विशेषकर माता-बहनों ने, स्वयंसेवकों पर भरपूर पुष्प वर्षा की, जो संघ के प्रति समाज के सम्मान और स्नेह को दर्शाता है। पथ संचलन जिन-जिन चौक-चौराहों से गुजरा, वहाँ स्थानीय लोगों द्वारा जबरदस्त आतिशबाजी की गई और पटाखे फोड़े गए। यह उत्साह और उमंग का प्रदर्शन था, जिसने पूरे कार्यक्रम को एक ऐतिहासिक और अविस्मरणीय स्वरूप  प्रदान  किया। स्वयंसेवकों का यह प्रदर्शन अनुशासन, एकता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक था। जिसके बाद आयोजित बौद्धिक सभा में संघ की राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

लोहिया चौक पर आयोजित बौद्धिक सभा में मंच पर प्रमुख वक्ता ठाकुर राम जी (राजिम विभाग प्रचारक), कार्यक्रम अध्यक्ष हरका बहादुर कालीकोटी (संचालक, आदित्य अस्पताल महासमुंद एवं अध्यक्ष आई.एम.ए. महासमुंद), भूपेंद्र राठौर (नगर संघचालक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता), राजेश डड़सेना (नगर कार्यवाह), गुलाब ठाकुर (महाविद्यालय प्रमुख), नेहरू पटेल (बस्ती प्रमुख), अखिलेश राव (बस्ती सह-प्रमुख ) और सरदार सुमित सिंह ढिल्लों (उत्सव प्रभारी) उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित कर माँ दुर्गा और भगवान श्री रामचंद्र के छायाचित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई।

कार्यक्रम अध्यक्ष हरका बहादुर कालीकोटी ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने पर सभी को बधाई दी। उन्होंने संघ की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ एक ऐसी तपस्या है जो व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित है। उन्होंने नियमित शाखाओं के महत्व को बताते हुए कहा कि यह संगठन निस्वार्थ भाव से समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा, सुरक्षा और संस्कार पहुँचाने का कार्य कर रहा है।
मुख्य वक्ता ठाकुर राम जी ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में संघ की भावी दिशा को रेखांकित करते हुए संघ के 'पंच परिवर्तन' की बात रखी। उन्होंने बताया कि संघ समाज को संगठित, संस्कारित और राष्ट्र भाव से युक्त बनाने के लिए हमे पंच परिवर्तन जो कि साप्ताहिक मिलन, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और ग्राम विकास के पाँच आयामों पर विशेष बल देना है।

उन्होंने संघ की विशेषताओं पर विस्तार से बताते हुए कहा संघ का मूल कार्य संस्कार और चरित्र निर्माण करना है, जिससे एक आदर्श नागरिक तैयार होता है। संघ जाति, पंथ या वर्ग भेद को माने बिना पूरे समाज को संगठित करने के लिए प्रतिबद्ध है। बिना किसी प्रचार या प्रतिफल की इच्छा के, संघ के स्वयंसेवक आपदा और सामान्य दिनों में सेवा कार्य करते हैं। संघ देश को सर्वोपरि मानकर व्यक्ति में अखंड राष्ट्रभक्ति की भावना जाग्रत करता है। यह कार्यक्रम महासमुंद नगर में सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना को मजबूती देने में सफल रहा। संघ प्रार्थना के साथ ही कार्यक्रम समापन की घोषणा की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पूर्ण गणेश में स्वयंसेवक, नागरिक बंधु, मातृ शक्ति उपस्थित थे।

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